देश में जात-पात की करो विदाई,
हम सब हिंदू हैं – भाई-भाई।
दुर्भाग्य की बात है कि आज हम जाति से ऊपर उठने की बात तो करते हैं,
लेकिन व्यवस्थाएँ हमें फिर उसी खांचे में बाँट देती हैं।
यूजीसी जैसी संस्थाओं के नियमों और नीतियों के कारण
योग्यता से ज़्यादा पहचान पूछी जाने लगी है।
परिणाम यह हुआ कि देश फिर से
जात-पात की एक लंबी और गहरी खाई में बँटता जा रहा है।
जिस शिक्षा का उद्देश्य था
समाज को जोड़ना,
वही शिक्षा आज अनजाने में
दीवारें खड़ी कर रही है।
हमें याद रखना होगा—
भारत की आत्मा एकता में है,
न कि वर्गीकरण में।
आइए,
जाति नहीं योग्यता,
पहचान नहीं प्रतिभा,
और भेद नहीं भाईचारा चुनें।
क्योंकि जब तक हम बँटे रहेंगे,
तब तक आगे नहीं बढ़ पाएँगे।
जय हिंद।
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Radhe Krishna
Jai shree Krishna