भारत के दक्षिण प्रांत किसी शहर में एक जज साहब हुआ करते थे। उस शहर के पास एक छोटे से गांव में एक केवट रहता था वह बहुत सीधा और सरल था।
उसकी रघुनाथ जी में बड़ी आस्था थी। जब भी कोई उसे कहता केवट भैया वह बात कैसी है वह कहता रघुनाथ जी जाने। मैं तो कुछ नहीं जानता
मैं इतना सरल और सीधा था कि लोगों ने उसका नाम भोला रख दिया
भोला के दो बेटे और एक बेटी थी। बेटी विवाह योग्य होई, भोला के बेटे ने कहा पिताजी गांव के साहूकार से कुछ पैसा उधार लेकर विवाह कर दीजिए। हम दोनों भाई मेहनत करके उधुार चूुका देंगे
भोला सेठ जी के पास गया ₹200 उधार लिए और ब्याज की रकम तय हो गई। भोला पैसे लेकर वापस आया बेटी की शादी धूमधाम से करी। बेटी ससुराल में विदा हो गई और भोला स्वयं मंदिर में जाकर रहने लगा उसके लिए तो रघुनाथ जी सब कुछ थे।
बेटे ने कमाई की पैसा लाकर भोला के हाथ में रखा। और कहा पिताजी जिस से उधार लिया है उनका उधार चुका दीजिए। भोला पैसे लेकर सेठ जी के पास गए और उनका पूरा पैसा मय ब्याज के चुका दिया सेठ जी ने उनको एक कागज की रसीद दी जिसमें पूरा हिसाब किताब लिखा था। उसमें लिखा था हिसाब चुकता। पैसा मय ब्याज के मिल गया है।
सेठ ने भोला केवट को रसीद दी और कहा पढ़ो इसमें क्या लिखा है भोला केवट बोला मैं कुछ नहीं जानता जो जाने रघुनाथ जी जाने। यह सुनकर सेठ के मन में लालच आ गया।
सेठ ने रसीद वापस मांग ली और दूसरा कागज में कुछ लिखकर बोला केवट पानी ले आओ। भोला केवट पानी लेने चला गया इतने में सेठ ने रसीद बदल दी और दूसरी रसीद भोला केवट को दे दी।
भोला रशीद को अपने घर लाया और श्री रघुनाथ जी के चरणों में समर्पित करके अपने कमरे की अलमारी में रख दिया और प्रसन्न मन से रघुनाथ जी का भजन करने लगा।
सेठ के मन में लालच अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया और सेठ ने भोला केवट के विरुद्ध कोर्ट में केस दर्ज कर दिया।
भोले का केस इन्हें जज साहब की अदालत में आया जिनकी चर्चा हम कर रहे हैं।
कोर्ट की पहली तारीख पर केवट जज साहब के सामने उपस्थित हुआ जब सब ने पूछा केवट तुमने सेठ जी से पैसा उधार लिया था केवट बोला हां हजूर मैंने पैसा उधार लिया था
दे दिया,हां दे दिया जज साहब,कोई प्रमाण है हां साहब यह रसीद है भोला केवट ने जज साहब को उत्तर में कहा।
जज साहब ने रसीद देखी और इस देखने के बाद जज साहब ने कहा कि इससे यह सिद्ध नहीं होता है कि तुमने रुपया दे दिया है यह सुनकर भोला केवट रोने लगा और कहने लगा साहब हमने तो इसकी सब कुछ समझा था । जज साहब ने बोल केवट को चुप कराया और बोला कि जब तुमने सेठ को रुपया दिया तब वहां कोई और भी था क्या?
भोला केवट ने कहा वहां पर मेरे और सेठ जी के अलावा रघुनाथ जी के अलावा और कोई मौजूद नहीं था।
केवट ने सहज भाव से रघुनाथ जी का नाम लिया और जज साहब को लगा कि उनके गांव के रहने वाले कोई सज्जन पुरुष होंगे जज साहब ने कहा ठीक है अगली तारीख पर आना।
जज साहब ने अपने खर्चे पर एक समन रघुनाथ जी के नाम से डाकिए के हाथ से भिजवा दी। अब डाकिया रघुनाथ जी का समन लिए गांव में आया परंतु उसे रघुनाथ जी नाम का कोई आदमी ना हीं घर मिला। एक सज्जन पुरुष से उसने पूछा कि भाई रघुनाथ जी कहां रहते हैं सज्जन ने कहा कि गांव में रघुनाथ जी तो नहीं है परंतु रघुनाथ जी का एक मंदिर है डाकिया भी मंदिर पहुंचा और मंदिर के पुजारी से पूछा क्या रघुनाथ जी का मंदिर यही है पुजारी ने कहा हां डाकिया बोला को सामान पुजारी ने मन ही मन सोचा, प्रभु ने समन बुला लिया है तो हम वापस क्यों करें। हस्ताक्षर पुजारी ने कर दिए। डाकिए को लगा यही रघुनाथ जी हैं।
पुजारी ने समान रघुनाथ जी के चरणों में रख दिया और कहां प्रभु आपके लिए फल आए फूल आए, वस्त्र आए, मुकुट आए आज कोई समन भी ले आया। वाह प्रभु आपकि लीला।
केवट गांव में वापस आया तो मंदिर पुजारी ने कहा कि रघुनाथ जी का नाम क्यों लिख दिया केवट ने कहा हम तो हर जगह रघुनाथ जी का नाम लेते हैं वहां भी ले लिया अंततः केवट बोला रघुनाथ जी जाने जो होगा देखा जाएगा।
अदालत की अदालत की तिथि आई। मंदिर के पुजारी ने कहा बोला केवट तुम जाओ ताकि समय पर अदालत में पेश हो सको रहा रघुनाथ जी का तो रघुनाथ जी की तो रघुनाथ जी जाने।
पुजारी जी ने रघुनाथ जी को स्नान कराया नए वस्त्र पहना है भोग लगाया और कहने लगा प्रभु जी आज आपको बाहर जाना है आप कैसे करेंगे मुझे नहीं पता परंतु भोला केवट की लाज आपको रखनी है आपके अलावा उसका है ही कौन। इतना कहकर पुजारी जी के आंखों से अश्रु की धारा बह निकली।
केवट अदालत में पहुंचा जज साहब ने पूछा केवट रघुनाथ जी कहां है केवट ने कहा वह सब जगह है यहीं कहीं होंगे जज साहब ने रघुनाथ जी को बुलाने का आदेश दिया अदालत के चपरासी ने कहा रघुनाथ जी हाजिर हो रघुनाथ जी हाजिर हों रघुनाथ जी हाजिर हो।
तीसरे स्वर में क्या देखते हैं एक वयोवृद्ध कमर झुकी हुई है हाथ में लाठी पकड़े हुए हैं अदालत में प्रवेश कर रहे हैं जज साहब ने रघुनाथ जी को कटघरे में बुलाया
भोला केवट ने रघुनाथ जी को प्रणाम किया सेठ ने जैसे ही वयोवृद्ध जी को देखा वह चौंक गया और मन ही मन सोचा यह कौन है।
जज साहब ने रघुनाथ जी से पूछा क्या केवट ने रुपया वापस कर दिया रघुनाथ जी बोले हां कर दिया जज साहब बोले उसका कोई प्रमाण है रघुनाथ जी बोले हां है।
सेठ जी को अदालत में ही रखा जाए उनकी बैठक में रजिस्टर है उसे यहां मंगाया जाए जज साहब ने आदेश दिया चपरासी सेठ के घर से गया वह रजिस्टर उठा लाया। उसे रजिस्टर में वह रशीद बीवी रखी हुई थी जो सामने उसे रसीद को दिखा और उसमें लिखा था हिसाब चुकता पैसा में ब्याज के मिल गया है जो सामने बोल केवट को बरी कर दिया। और सेठ जी दंडित हुए।
गवाही देने गवाह के रूप में आए रघुनाथ जी भी अंतर ध्यान हो गए थे।।
जज साहब ने भोला को अपने केबिन में बुलाया और पूछा यह रघुनाथ जी कहां रहते हैं भोला ने कहा जहां हम रहते हैं।
जब सामने पूछा क्या तुम दोनों एक ही गांव में रहते हो भोला ने कहा हां हम दोनों की गांव में रहते हैं गांव में उनका मंदिर है
जज साहब ने सोचा मंदिर के पुजारी तो लग नहीं रहे थे और मंदिरों इन्होंने बनवाया हो ऐसी उनकी हैसियत नहीं लग रही थी।
केवट बोला यह वही है जो मंदिर में विराजमान है। यह वही है जो घाट-घाट में विराजते हैं। ज्यों ही जज साहब ने सुना एकदम सकते में आए उन्होंने डाकिए को बुलवाया। डाकिए ने कहा जिस आदमी ने हस्ताक्षर किए थे यह वह नहीं था।
जब जज साहब को सारा रहस्य पता लगा जज साहब रोने लगे और कहने लगे
"जो बड़े बड़े ऋषि मुनियों के ध्यान में नहीं आते जिन्हें पाने के लिए वर्षों तक तपस्या करते हैं वह एक केवट के लिए गवाह बनकर आए,
जिनकी अदालत में सब हाजिरी भरते हैं आज वह मेरी अदालत में हाजिरी भरने आए ऐसे स्वामी के सामने मैं कुर्सी पर जज बन कर बैठा रहा।"
जज सामने वकालत से इस्तीफा दे दिया और वृंदावन आ गए।
वह कभी मंदिर के अंदर नहीं गए।
क्योंकि- “ आ तो गया हूं मगर जानता हूं तेरे दर पे आने के काबिल नही हूं। तेरी मेहरबानी का बोझ है इतना उसे उठाने के काबिल नहीं हूं"
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