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श्री भ्रमरांबा अम्मावारी शक्तिपीठ
🕉️ पवित्र मंदिर

श्री भ्रमरांबा अम्मावारी शक्तिपीठ

, Srisailain, Andhra Pradesh, India

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श्री भ्रमरांबा अम्मावारी शक्तिपीठ: देवी का दिव्य स्थान

आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित श्री भ्रमरांबा अम्मावारी शक्तिपीठम मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक मल्लिकार्जुन स्वामी और देवी पार्वती (भ्रमरांबा) को समर्पित है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां देवी सती का गला गिरा था। यही कारण है कि यह स्थान हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है।


पौराणिक कथा और महत्व

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में आत्मदाह कर लिया, तो भगवान शिव ने उनके शरीर को लेकर तांडव नृत्य किया। इस दौरान भगवान विष्णु ने सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से 51 भागों में विभाजित कर दिया।

ऐसा माना जाता है कि सती का गला श्रीशैलम में गिरा था। यहां देवी पार्वती को भ्रमरांबा के रूप में पूजा जाता है। "भ्रमर" का अर्थ है "मधुमक्खी," और देवी को इस रूप में इसलिए जाना जाता है क्योंकि उन्होंने एक मधुमक्खी के रूप में राक्षस अरुणासुर का वध किया था।


मंदिर का इतिहास और वास्तुकला

श्रीशैलम मंदिर का निर्माण सातवीं शताब्दी में चालुक्य राजाओं ने करवाया था। मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली में निर्मित है।

मंदिर का परिसर अत्यंत भव्य है और इसमें देवी भ्रमरांबा और भगवान मल्लिकार्जुन के अलग-अलग गर्भगृह हैं। गर्भगृह को चारों ओर से सुंदर नक्काशीदार स्तंभों से सजाया गया है।

मंदिर की गुफाओं में अद्वितीय मूर्तियां और शिलालेख हैं, जो यहां के इतिहास और पौराणिक कथाओं का सजीव चित्रण करते हैं।


धार्मिक अनुष्ठान और पूजा

मंदिर में प्रतिदिन भगवान मल्लिकार्जुन और देवी भ्रमरांबा की पूजा होती है। भक्त यहां विशेष रूप से अभिषेकम और आरती में भाग लेते हैं।

प्रमुख उत्सव

  • महाशिवरात्रि: इस दिन यहां हजारों श्रद्धालु भगवान शिव और देवी पार्वती के दर्शन के लिए आते हैं।
  • नवरात्रि: देवी भ्रमरांबा के लिए विशेष पूजा और भव्य समारोह आयोजित किए जाते हैं।
  • कार्तिक मास: इस महीने में दीपोत्सव और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है।

श्रीशैलम: प्राकृतिक और धार्मिक महत्व

श्रीशैलम मंदिर नल्लामाला पर्वतमाला के बीच स्थित है, और इसे प्राकृतिक सौंदर्य का वरदान प्राप्त है। यह मंदिर कृष्णा नदी के किनारे स्थित है, जो इसे और भी पवित्र बनाती है।

मंदिर तक पहुंचने के लिए पर्वतों से होकर गुजरने वाला मार्ग बेहद आकर्षक और अद्वितीय है। भक्त यहां केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का अनुभव करने के लिए भी आते हैं।


कैसे पहुंचे श्रीशैलम शक्तिपीठ?

हवाई मार्ग

निकटतम हवाई अड्डा हैदराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (करीब 230 किमी) है। वहां से टैक्सी या बस द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग

निकटतम रेलवे स्टेशन मारकपुर रेलवे स्टेशन (करीब 85 किमी) है। यहां से मंदिर तक टैक्सी या बस की सुविधा उपलब्ध है।

सड़क मार्ग

श्रीशैलम आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहां नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं।


श्रीशैलम की यात्रा का सही समय

श्रीशैलम की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी का है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और भक्त महाशिवरात्रि, नवरात्रि, और अन्य उत्सवों का आनंद ले सकते हैं।


निष्कर्ष

श्री भ्रमरांबा अम्मावारी शक्तिपीठम मंदिर, श्रीशैलम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, और प्रकृति का संगम है। यहां देवी पार्वती और भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ नल्लामाला पहाड़ियों का मनमोहक दृश्य भी देखने को मिलता है।

यदि आप पवित्र शक्ति पीठों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो श्रीशैलम का यह मंदिर आपकी सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए। यहां आकर आप आध्यात्मिक ऊर्जा और आंतरिक शांति का अनुभव कर सकते हैं।

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