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अभी मंदिर जोड़ेंसमाधि, साधना और शिवत्व का अद्भुत संगम—यही पहचान है राजस्थान के ऐतिहासिक नगर चित्तौड़गढ़ में स्थित समाधिश्वर मंदिर की। यह प्राचीन शिव मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर स्थित है और न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि राजपूत कालीन वास्तुकला और सांस्कृतिक वैभव का जीवंत प्रमाण भी है।
समाधिश्वर मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी के आसपास माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर विभिन्न कालखंडों में संरक्षित और पुनर्निर्मित होता रहा।
प्रारंभिक निर्माण का श्रेय परमार वंश से जोड़ा जाता है।
12वीं–13वीं शताब्दी में कुमारपाल और समरसिंह जैसे शासकों ने इसका संरक्षण कराया।
15वीं शताब्दी में राणा मोकल सिंह के समय मंदिर का व्यापक जीर्णोद्धार हुआ।
यह मंदिर कभी त्रिभुवन नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता था, जो इसके वैष्णव–शैव समन्वय की ओर संकेत करता है।
इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा “समाधीश्वर” के रूप में की जाती है—अर्थात समाधि के स्वामी।
यह स्वरूप ध्यान, आत्मिक शांति और ब्रह्मज्ञान का प्रतीक है। गर्भगृह में स्थापित त्रिमुखी शिव प्रतिमा विशेष आकर्षण है, जो शिव के तीन रूपों—सृष्टि, पालन और संहार—का प्रतीक मानी जाती है।
समाधिश्वर मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली में निर्मित है और इसकी संरचना अत्यंत सुस्पष्ट व संतुलित है।
मुख्य वास्तु तत्व:
गर्भगृह – जहाँ शिवलिंग/प्रतिमा स्थापित है
अंतराल – गर्भगृह और मंडप को जोड़ने वाला भाग
मंडप – सभा एवं पूजा-अर्चना हेतु
तीन दिशाओं से प्रवेश द्वार, जो मंदिर को विशिष्ट बनाते हैं
मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर की गई नक्काशी तत्कालीन शिल्पकला की उत्कृष्टता दर्शाती है।
यह मंदिर ध्यान और साधना का प्रतीक माना जाता है।
महाशिवरात्रि, सावन मास और प्रदोष व्रत पर यहाँ विशेष भीड़ रहती है।
श्रद्धालु मानते हैं कि यहाँ दर्शन मात्र से मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
समाधिश्वर मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के साथ मिलकर एक पूर्ण आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव कराता है।
समाधिश्वर मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग (Chittor Fort) के भीतर, गौमुख कुंड के समीप स्थित है। यह स्थान विजय स्तंभ और अन्य ऐतिहासिक स्मारकों के पास होने के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है।
पूरा पता:
समाधिश्वर मंदिर,
चित्तौड़गढ़ दुर्ग परिसर,
जिला चित्तौड़गढ़,
राजस्थान – 312001, भारत
निकटतम रेलवे स्टेशन: चित्तौड़गढ़ जंक्शन
स्टेशन से दुर्ग की दूरी: लगभग 6–7 किमी
ऑटो/टैक्सी आसानी से उपलब्ध
उदयपुर, भीलवाड़ा, कोटा से चित्तौड़गढ़ के लिए नियमित बसें
निजी वाहन से दुर्ग तक सीधा मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा: उदयपुर (डबोक एयरपोर्ट)
दूरी: लगभग 90 किमी
अक्टूबर से मार्च – मौसम सुहावना रहता है
सुबह और संध्या काल – शांत वातावरण में दर्शन का सर्वोत्तम अनुभव
समाधिश्वर मंदिर, चित्तौड़गढ़ केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि हजार वर्षों से प्रवाहित होती शिव-भक्ति, साधना और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है। यह मंदिर हमें सिखाता है कि शक्ति का सर्वोच्च रूप ध्यान और आत्मज्ञान में निहित है।
यदि आप चित्तौड़गढ़ दुर्ग की यात्रा कर रहे हैं, तो समाधिश्वर मंदिर के दर्शन अवश्य करें—यह अनुभव इतिहास, अध्यात्म और आस्था को एक सूत्र में बाँध देता है। 🙏
नाम जाप एक साधारण किंतु अत्यंत गहन आध्यात्मिक साधना है। जब हम बार-बार भगवान के नाम या मंत्र का स्मरण करते हैं, तो मन शांत होता है और आत्मा में भक्ति का भाव जाग्रत होता है।
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