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अभी मंदिर जोड़ेंभारत अपनी आध्यात्मिक विरासत और अद्भुत मंदिर परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ हर मंदिर की अपनी अलग कथा, मान्यता और चमत्कार है। बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित एक ऐसा ही विलक्षण और आस्था से भरा मंदिर है, जहाँ भगवान हनुमान की पूजा उनके सामान्य स्वरूप में नहीं, बल्कि स्त्री रूप में की जाती है।
यह अद्भुत मंदिर स्थित है झांसी में और इसे सखी के हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है।
सखी के हनुमान मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहाँ पवनपुत्र हनुमान स्त्री रूप में विराजमान हैं। यह स्वरूप भक्तों के लिए अत्यंत अद्भुत और भावनात्मक अनुभूति देने वाला है।
मंदिर के महंतों के अनुसार, बजरंग बली के इस स्वरूप का उल्लेख आनंद रामायण में मिलता है। एक प्रसिद्ध चौपाई में कहा गया है—
“चारुशिला नामक सखी सदा रहत सिय संग,
इत दासी उत दास हैं, त्रिया तन्य बजरंग।”
इस चौपाई का भाव यह है कि माता सीता की सेवा के लिए हनुमान जी ने स्त्री रूप धारण किया था। उसी दिव्य स्वरूप की पूजा आज भी इस मंदिर में परंपरागत रूप से की जाती है।
इस मंदिर का इतिहास लगभग 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि उस समय ओरछा में सखी बाबा नामक एक महान संत हुआ करते थे। एक दिन उन्हें स्वप्न में हनुमान जी की सखी वेश में प्रतिमा के दर्शन हुए।
स्वप्न में उन्हें यह दिव्य आदेश भी मिला कि इस प्रतिमा को ओरछा के समीप स्थापित किया जाए। संत सखी बाबा ने इस आदेश का पालन करते हुए प्रतिमा को झांसी के पास स्थापित कराया। तभी से यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।
झांसी–कानपुर हाईवे पर स्थित यह मंदिर आज भी हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
सखी के हनुमान मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, भक्ति और समर्पण की गहराई को भी दर्शाता है। अगर आप झांसी या बुंदेलखंड क्षेत्र में हैं, तो इस अनोखे मंदिर के दर्शन अवश्य करें। यह स्थान आपको भक्ति के एक नए भाव से जोड़ देगा।
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नाम जाप एक साधारण किंतु अत्यंत गहन आध्यात्मिक साधना है। जब हम बार-बार भगवान के नाम या मंत्र का स्मरण करते हैं, तो मन शांत होता है और आत्मा में भक्ति का भाव जाग्रत होता है।
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